
देहरादून के केदारपुरम स्थित नारी निकेतन में नियम कायदे बिल्कुल कालापानी जैसे हैं।
परिसर में कोई प्रवेश नहीं कर सकता। आशा कार्यकत्रियों तक को भी जाने की इजाजत नहीं है। यही वजह है कि यहां रहने वाली संवासनियां और उनके बच्चे बीमारी में तड़पते रहते हैं और उनकी देखभाल नहीं हो पाती।
चिकित्सा सुविधा के नाम पर कुछ नहीं
दो संवासनियों की मौत के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस नारी निकेतन में चल क्या रहा है? ऐसा क्या है जिसे छिपाया जा रहा है? नारी निकेतन के आसपास रहने वाले लोग बताते हैं कि यहां चिकित्सा सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है।
महिलाओं और बच्चों का हर माह हेल्थ चेकअप तक नहीं कराया जाता। एंबुलेंस तक नहीं है। कई बार ऐसा हुआ है कि प्रसव पीड़ा में कराहती संवासनी को ऑटो से अस्पताल पहुंचाया गया।
आशा कार्यकत्रियों को भी अनुमति नहीं
लोग मांग कर चुके हैं कि आशा कार्यकत्रियों को नारी निकेतन में आने की अनुमति दी जाए, ताकि गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के अलावा उन्हें टीके लगाए जा सकें। लेकिन नारी निकेतन प्रशासन तैयार नहीं है।
लोग बताते हैं कि अंदर क्या चलता है किसी को कुछ पता नहीं। उन्होंने एक-दो बार संवासनियों को दीवार फांदकर भागते हुए देखा है। किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं है। न ही कभी यहां कोई मेडिकल या अन्य कोई कैंप लगाया जाता है।
…जैसा मैम कहेंगी, वैसा ही होगा
गुरुवार को अमर उजाला की टीम मामले की पड़ताल के लिए नारी निकेतन पहुंची, लेकिन यहां किसी भी स्थिति में प्रवेश प्रतिबंधित है। संवाददाता ने परिचय पत्र दिखाकर अंदर जाने के लिए कहा तो गार्ड मुस्कुरा कर बोला, मैम (नारी निकेतन इंचार्ज) से पूछता हूं।
अंदर जाने के बाद गार्ड करीब 15 मिनट बाद लौटा, लेकिन अब उसके तेवर बदले थे। तल्ख अंदाज में बोला कि मैम यहां नहीं हैं, बाजार गई हैं। आप गेट पर पढ़िये कि मजिस्ट्रेट की इजाजत के बिना कोई भीतर नहीं जा सकता।
संवाददाता ने कहा कि मजिस्ट्रेट की इजाजत लेकर आएं क्या? इस पर गार्ड का जवाब था कि ‘मैम जैसा कहेंगी वैसा ही होगा’। गार्ड की बातों से साफ था कि ‘मैम’ अंदर हैं, लेकिन मिलना नहीं चाहतीं।
दो संवासिनियों की मौत, पांच बीमार
समाज कल्याण विभाग के नारी निकेतन की बदहाली वहां रह रही संवासिनियों की मौत का कारण बन रही है। तीन दिन के अंदर निकेतन की दो संवासिनियों की बीमारी से मौत हो गई।
पांच संवासिनियों को गंभीर हालत में दून अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि ज्यादातर संवासिनियों को मिरगी के दौरे पड़ते हैं। वे कुपोषण और एनीमिया की शिकार हैं।
नारी निकेतन की संवासिनी रानी (24) की 16 दिसंबर को मौत हुई थी। दूसरी संवासिनी सूरजी (21) की बुधवार रात दून अस्पताल में मौत हो गई। उसे मिरगी के दौरे पड़ते थे। डायरिया की शिकायत पर उसे दून अस्पताल लाया गया था।
गंभीर हालत में हैं सवांसिनी
गुरुवार को डायरिया होने पर नीना (20) को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया। उसे भी मिरगी के दौरे आते हैं। नीना को अस्पताल केयर टेकर लाई थीं, निकेतन का कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं था।
दून अस्पताल के वार्ड 17 में निकेतन की चार संवासिनियां पहले से भर्ती हैं। इनमें मैरीना (30), रेनू (21), हमसोली (45) और प्रिया (25) हैं। ये संवासिनियां डायरिया, लीवर और पेट रोग से बीमार हैं।
उनकी तीमारदारी कर रहीं केयर टेकर रेवती जोशी और कमला शर्मा ने बताया कि ज्यादातर को मिरगी के दौरे आते हैं। व्यवस्था का हाल यह है कि उन्हें 9 महीने से वेतन नहीं मिला है। वे संविदा पर काम कर रही थीं।
संवासिनियों की बीमारी की जानकारी है। वहां की इंचार्ज से बात की है। और स्थिति का पता लगाएंगे।
– राम अवतार सिंह, समाज कल्याण अधिकारी
बीमारी हो सकती है, लेकिन नारी निकेतन में गंदगी नहीं है। आप जाकर खुद देख लीजिये। वैसे हम स्थिति दिखवाएंगे।
